उत्तराखंड राज्य स्थापना क़ी रजत जयंती एवं वन्देमातरम क़ी 150वीं वर्षगांठ पर उत्तराँचल यूनिवर्सिटी साहित्य सभा का ऑनलाइन वेबिनार
उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में उत्तराँचल यूनिवर्सिटी के छात्र छात्राओ नें “एक भारत – एक स्वर : वन्देमातरम” पर अपने विचार साझा किये
उत्तराखंड की स्थापना 9 नवंबर 2000 को हुई थी। उत्तराखंड को “देव भूमि” या “देवताओं की भूमि” के रूप में जाना जाता है। शुरुआत में उत्तरांचल के नाम से जाने जाने वाले इस राज्य का नाम औपचारिक रूप से 2007 में बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया
प्रोफेसर अनिल दीक्षित नें बताया कि उत्तराखंड को भारत के 27वें राज्य के रूप में बनाया गया था, जब इसे उत्तरी उत्तर प्रदेश से अलग किया गया था। यह हिमालय पर्वत शृंखला की तलहटी में स्थित है, जो काफी हद तक एक पहाड़ी राज्य है।
राज्य बनने के बाद उत्तराखंड नें औद्योगिक विकास में तेजी, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, और बुनियादी ढांचे का विकास किया, उच्च-शिक्षा के विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटियों की स्थापना, राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन, केदारनाथ व बद्रीनाथ जैसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण किया ।
उत्तराखंड के कण कण में व्याप्त “वन्देमातरम” के एतिहासिक महत्व का वर्णन करते हुए उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के छात्र पार्थ सिंघल नें कहा कि यह गीत भारत के स्वंत्रता संग्राम की आत्मा है l
छात्र आयुषी शंकर नें बताया कि कवि बंकिम चन्द्र चटर्ज़ी द्वारा रचित “वन्देमातरम” का प्रकाशन पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में हुआ जो बाद में आनंदमठ में शामिल हो स्वंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया l
छात्र मोहम्मद अदीब नें कहा कि वन्देमातरम भारत की राष्ट्रीय पहचान बन स्वतंत्रता सेनानियों को गुलामी की जंज़ीर तोड़ने के लिये प्रेरित करनें लगा जिसने अंग्रेजो की नींद उड़ा दी l
छात्रा एशप्रीत बजाज नें “वन्देमातरम” के एतिहासिक महत्व पर चर्चा करते कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रति कृतज्ञता अर्पित की जिन्होंने वन्देमातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्ज़ा देने का प्रस्ताव रखा l
इस ऑनलाइन वेबिनार में आदर्श कुमार तिवारी, राहुल रावत,आयुषी शंकर, आशुतोष नौटियाल, पार्थ सिंघल, मोहम्मद अदीब, अंश, हर्ष, रश्मी, ऐशप्रीत बजाज, भूमिका रौथान, ऋषिका, अपूर्वा, रजत, आयुष मौजूद रहे l