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*जालौन: सिपाही को नहीं मिली छुट्टी, पत्नी और बच्ची की मौत: जालौन में तैनाती, आगरा में होनी थी डिलीवरी, मौत के बाद लिखा-मेरे दोनों बच्चे मुझे माफ करना*

*बड़ी खबर*
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*जालौन: सिपाही को नहीं मिली छुट्टी, पत्नी और बच्ची की मौत: जालौन में तैनाती, आगरा में होनी थी डिलीवरी, मौत के बाद लिखा-मेरे दोनों बच्चे मुझे माफ करना*

              जालौन में एक सिपाही की पत्नी और नवजात की मौत हो गई। सिपाही ने थानाध्यक्ष को छुट्टी के लिए एप्लीकेशन दी थी, जो कि एक्सेप्ट नहीं हुई। इससे वह गर्भवती पत्नी को अस्पताल नहीं ले जा सका और दोनों की मौत हो गई। मौत के बाद दुखी सिपाही ने सोशल प्लेटफार्म पर लिखा-दोनों बच्चे मुझे माफ करना।  घटना की जानकारी जैसे ही पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को हुई तो सिपाही को तुरंत छुट्टी देकर घर भेजा। लेकिन तक बहुत देर हो चुकी थी। वहीं, जालौन के एसपी ने मामले में संज्ञान लेते हुए तत्काल एक पत्र जारी किया और सभी एसओ, सीओ को निर्देश दिए कि, किसी को भी अनावश्यक रूप से छुट्टी देने से मना न किया जाए।
जिस दिन डिलीवरी उसी दिन लगाई थी एप्लीकेशन
दरअसल, मामला जालौन के रामपुरा थाना क्षेत्र का है। यहां पर एक सिपाही विकास निर्मल दिवाकर इसी साल यहां आया है। विकास मूलरूप से मैनपुरी का रहने वाला है। उसकी पत्नी ज्योति गांव में परिवार के साथ रहती है। विकास की पत्नी गर्भवती थी और उसका नौवां महीना चल रहा था। पिछले नौ महीने से विकास लगातार अपनी पत्नी के देखरेख के लिए छुट्टी लेकर घर जाया करता था। वह पत्नी का इलाज आगरा में करवा रहा था। डिलीवरी के लिए भी उसे पत्नी को आगरा में ही भर्ती करवाना था। पिछले महीने सब चेकअप आदि करवाकर वह ड्यूटी पर आ गया था। इस बीच शुक्रवार को पत्नी को अचानक प्रसव पीड़ा हुई। विकास ने तत्काल अपने थानाध्यक्ष को एप्लीकेशन दी कि उसे पत्नी की देखभाल के लिए घर जाना है। लेकिन थानाध्यक्ष ने यह कहते हुए एप्लीकेशन अस्वीकार कर दी कि तुम बहुत छुट्टियां ले चुके हो। इस बात विकास बहुत निराश हुआ। उसने घर वालों से कहा कि तत्काल पत्नी को लेकर अस्पताल जाइए। मैनपुरी में उसके घर वाले पत्नी को लेकर कुरावली सीएचसी लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टर्स ने उसका ट्रीटमेंट शुरू किया। थोड़ी देर बार पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन दोनों की तबियत ठीक नहीं थी। यहां से दोनों को मैनपुरी जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। कुछ घंटे यहां पर इलाज किया गया लेकिन हालत ठीक नहीं हो रही थी। इसलिए दोनों जच्चा-बच्चा को आगरा रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस से जब वह आगरा के लिए निकले तो रास्ते में ही दोनों ने दम तोड़ दिया। विकास की पत्नी की यह पहली डिलीवरी थी।
*एसपी ने दिलवाई छुट्टी:* पत्नी की गंभीर स्थिति की जानकारी होते ही विकास ने थानाध्यक्ष रामपुरा अर्जुन सिंह को छुट्टी के लिए एप्लीकेशन दी थी, पर थानाध्यक्ष ने छुट्टी स्वीकृत नहीं की। इस कारण सिपाही अपनी पत्नी के पास नहीं जा सका और न ही उसे हॉस्पिटल ले जा सका। आगरा में डिलीवरी के दौरान महिला और बच्चे की मौत हो गई। सिपाही ने इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी। उन्होंने तत्काल सिपाही को छुट्टी दी, जिससे वह अपने घर जा सके, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
*एसपी ने अधिकारियों को जारी किया आदेश*
एसपी ने एक पत्र जारी करते हुए कहा कि सभी सीओ, एसओ किसी भी सिपाही को छुट्टी देने के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न करें। 10 से 12 बजे तक प्रार्थना पत्र को थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी कार्यालय तक पहुंचाएं और क्षेत्राधिकारी शाम 6 बजे तक संस्तुति के साथ उसे आगे भिजवाएं। यदि शाम 6 बजे तक थाना प्रभारी और क्षेत्राधिकारी द्वारा प्रार्थना पत्र को अग्रसारित नहीं किया जाता है तो उसे स्वयं ही अग्रसारित माना जाएगा, साथ ही इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए।
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