ई-रिक्शा चलाकर घर के पाँच सदस्यों का पेट पालती है अवला नारी
कहते है कि मेहनत की आधी रोटी भी इज्जत से मिले तो वो भी अम्रत सॆ कम नही होती । हम बात कर रहे जनपद जालौन की वह नारी शक्ति की मिसाल महिला की जो अपने पति के देहान्त होने के बाद अपने तीन बच्चे और बूढ़े सास ससुर का पालन पोषण वाखूबी कर रही है। बता दे कि जालौन के मुख्यालय उरई के रामकुंड में रहने वाली तीस वर्षीय रेहाना खातून के पति की चार माह पहले मौत हो गई थी जिसके बाद उसके परिवार में पालन पोषण का कोई जरिया नही था साथ ही मकान का किराया भी सर पर बोझ की तरह था और बच्चों के खानपान के साथ साथ उनकी शिक्षा का भी ख्याल था जिसको लेकर रेहाना ने अपने ही पति के ई-रिक्शे को अपना गुजर बसर का जरिया बना डाला और समाज व खानदान की परवा किये बगैर घर के बूढ़े सास ससुर के साथ साथ एक विकलांग बच्ची के सारे खर्चे का बोझ अपने कंधे पर उढा लिया और देश में नारी शक्ति की मिसाल पेश कर दी जिससे उसकी हर जगह भूरी- भूरी प्रशंसा हो रही है।