बाल विवाह रोकथाम हेतु आमजनों को जागरूक करना जरूरी*
*बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम अन्तर्गत बाल विवाह करना कानूनी अपराध*
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झांसी : जिला प्रोबेशन अधिकारी/बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी सुरेन्द्र कुमार पटेल ने बताया कि इस वर्ष अक्षय तृतीया/अक्ति/अखा तीज पर्व दिनांक 19 अप्रैल 2026 को है, इस शुभ दिनों पर बिना किसी मुहुर्त के विवाह तथा अन्य शुभ कार्य किये जा सकते हैं। बुन्देलखण्ड में इस तिथि पर बडी संख्या में बाल विवाह विवाह किये जाने की कुप्रथा है, इसका मुख्य कारण है ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का अभाव एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्राविधानों की जानकारी न होना।
शासन की मंशानुरूप बालक/बालिकाओं के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुये जिला प्रोबेशन अधिकारी ने जनपद के समस्त प्रबुद्धजनों से अपील की है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम अन्तर्गत बाल विवाह करना/कराना कानूनी अपराध है, यदि कोई भी व्यक्ति/संस्था को बाल विवाह के सम्पन्न होने की जानकारी हो, तो वह अपने इलाके के पुलिस, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी/सहायक अधिकारी श्रीमती दीपिका त्रिवेदी संरक्षण अधिकारी (गैर-संस्थानिक) (9260902668) डी०सी०पी०यू० चाइल्ड हेल्पलाइन नं० (1098), श्रीमती प्रीति त्रिपाठी सेन्टर मैनेजर वन स्टाफ सेन्टर झॉसी (7007566073) (हेल्पलाइन नं0-181), बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री राजीव शर्मा (9411952526), सदस्य श्रीमती परवीन खान, श्रीमती दीप्ती सक्सेना, श्री कोमल सिंह, श्री हरिकृष्ण सक्सेना झॉसी पुलिस हेल्पलाइन नं0-112 और जिलाधिकारी महोदय को लिखित या मौखिक रूप से सूचित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यदि लड़की 18 वर्ष की आयु एवं लड़का 21 वर्ष की आयु से कम हो और यदि उनकी शादी परिवारजनों या रिश्तेदारों द्वारा करवाया जाता तो वह बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अन्तर्गत कानूनी उपराध माना जाएगा, ऐसे विवाह करवाने वाले व्यक्तियों जैसे-पण्डित, मौलवी, पादरी, पिता एवं रिश्तेदार, दोस्त इत्यादि में धारा-10 तथा बाल विवाह को सहमति देना व बढ़ावा देना या शामिल होना आदि में धारा-11 के अन्तर्गत 02 साल तक का कठोर कारावास एवं 01 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।