झांसी। बेतवा नदी की महत्वपूर्ण सहायक घुरारी नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं अतिक्रमण हटाने के संबंध में दायर याचिका पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), प्रधान पीठ, नई दिल्ली द्वारा मूल आवेदन संख्या 315/2026 प्रवीण कुमार पाण्डेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य में पारित आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ता प्रवीण कुमार पाण्डेय, केसर सिंह, नरेन्द्र कुशवाहा, चंदन एन. सिंह, पंकज रावत, ओमप्रकाश द्वारा जिलाधिकारी झांसी तथा जिलाधिकारी निवाड़ी को विस्तृत अभ्यावेदन एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।
अभ्यावेदन प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी झांसी ने प्रकरण की जांच एवं आवश्यक कार्यवाही के लिए संबंधित विभागों की संयुक्त समिति गठित कर दी है। समिति को घुरारी नदी, उसके फीडर चैनलों (नालों) एवं सहायक जल निकायों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अपने अभ्यावेदन में बताया है कि घुरारी नदी के प्रमुख सहायक जल निकायों एवं जलधाराओं में बबीना बड़ा ताल, बक्सी ताल रसोई, मानपुर तालाब, चकरपुर तलैया, पठारी तालाब, जनौली तालाब, रजपुरा तलैया, लाडपुरा तालाब तथा कनेरा नदी और बीएचईएल नाला समेत कई नाले शामिल हैं, जो वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण, सिंचाई व्यवस्था एवं क्षेत्रीय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आरोप है कि इन जलधाराओं एवं जल निकायों में अतिक्रमण, अवरोध, गाद जमाव, जलकुंभी के फैलाव तथा प्रदूषण के कारण इनके प्राकृतिक प्रवाह एवं जलधारण क्षमता पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि घुरारी नदी के विभिन्न हिस्सों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण, मिट्टी एवं मलबा भराव तथा दूषित नालों के प्रवाह के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप और प्रवाह गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। याचिकाकर्ताओं ने नदी एवं उसके सभी सहायक जल स्रोतों का सीमांकन, अतिक्रमण निष्कासन, गहरीकरण, वैज्ञानिक सफाई तथा प्रदूषण नियंत्रण की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि घुरारी नदी को वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात में जल संरक्षण एवं जनभागीदारी के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सराहा था। उस समय घुरारी नदी के पुनर्जीवन अभियान की देशभर में चर्चा हुई थी, किंतु वर्तमान में नदी एवं उसके सहायक जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है।
याचिकाकर्ता नरेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि बुंदेलखंड जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्र में घुरारी नदी, कनेरा नदी तथा उससे जुड़े सहायक जल निकायों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति शीघ्र जांच पूरी कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप एवं प्रवाह पुनर्स्थापित हो सकेगा। प्रशासन द्वारा शुरू की गई यह कार्रवाई क्षेत्र में जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।