उनाव बालाजी धाम की जीवन रेखा: औषधीय आस्था वाली पूज नदी में अवैध निर्माण प्रदूषण एवं का मामला नागाटी , केंद्र व राज्य को नोटिस
नई/दिल्लीझाँसी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान भूमि , नई दिल्ली ने खंडवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण नदी ” पूज ” में कथित अवैध निर्माण , प्रदूषण , प्रदूषण और प्राकृतिक जलमार्गों के अवरोध से जुड़े मामलों में गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। यह मामला मूल आवेदन संख्या 323/2026 के रूप में दर्ज किया गया है , सुनवाई 25 मई 2026 को हुई।
केस की डिजायनर इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर (अध्यक्ष) एवं डॉ. अफ़रोज़ अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की याचिका। कंपनियों में केसर सिंह , नरेंद्र कुशवाहा , पंकज रावत, बैशयम कुमार पांडे , चंदन एन. सिंह और ओम प्रकाश शामिल हैं।
सूची में कहा गया है कि पूज नदी , जिसका नाम प्राचीन ग्रंथों में ” पुष्वरवती ” भी बताया गया है , सिंध नदी एक प्रमुख सहायक नदी है। यह उद्गम मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में सुजावनी ग्राम के समीप स्थित है और यह लगभग 265 किमी की दूरी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ है। लगभग 3,648 वर्ग किमी का यह ज्वालामुखी नदी क्षेत्र की जल सुरक्षा , प्लांट पुनर्भरण एवं ज्वालामुखी संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दाखिल-खारिज में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के दतिया जिले के उनाव क्षेत्र में पूज और उसके डूब क्षेत्र की भूमि पर स्थानीय प्रशासन नियमों के तहत विरुध्द नदी द्वारा निर्माण कार्य किया जा रहा है। उत्पादकों के अनुसार यह नदी के प्राकृतिक प्रवाह , बाढ़ क्षेत्र एवं प्राकृतिक संतुलन के लिए गंभीर खतरे का कारण बन रहा है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित उनाव, भांडेर और उत्तर प्रदेश के जंगल और जालौन जिलों के लहरघेर्ड , नयागांव, सिमरधा, पोहरा, धमना, पंडोखर और नदीगांव आदि ग्रामों में राजस्व अभिलेखों में ” नाला ” के रूप में प्राकृतिक जलमार्ग और पहुज नदी के तटवर्ती द्वीपों पर अवैध निर्माण करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि ये नेचुरल क्रीक एवं सुपरमार्केट चैनल पूज रिवर के प्रोड्यूसर्स रीबॉर्न, रेनजल इंडस्ट्रीज और यूनिवर्सल बैलेंस मेंटेनेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं , वर्तमान में समुद्र तट पर सीवेज एवं कोलोराडो नालों का प्रवाह जारी है। इससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है , अवसाद की समस्या पैदा हो रही है और साउदी जल सीधे पहूज नदी में पहुंच कर नदी की जल गुणवत्ता और जलीय तरंगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
कंपनियों ने यह भी बताया कि दतिया के उनाव में पूहुज नदी क्षेत्र का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व अत्यंत प्राचीन है। यहां छोटी नदी में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य बालाजी को जल स्नान कराते हैं। स्थानीय सिद्धांतों के अनुसार नदी के जल में औषधीय गुण पाए जाते हैं , जिससे चर्म उत्पादों में लाभ होता है। याचिका में कहा गया है कि नदी क्षेत्र में अवैध आक्षेप , निर्माण कार्य, प्राकृतिक एवं जलधारा में व्यवधान से न केवल नदी का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो रहा है , बल्कि इसके पारंपरिक, धार्मिक , सांस्कृतिक एवं औषधीय महत्व पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
समीक्षा के दौरान झील की ओर से नदी तल में चल रहे कथित अवैध निर्माणों एवं प्रदूषण एसोसिएटेड फोटोग्राफ्स पर भी अधिकरण के विषय प्रस्तुत किए गए। अधिकरण ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे अगली बार पूर्व शपथपत्र से अपना जवाब दें। केस की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को पोस्ट की गई है।