*23 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली — नकली खाद कांड में खाकी पर उठे सवाल*
जालौन :० जिले के एट क्षेत्र के पिरौना गांव में उजागर हुए नकली खाद कांड को अब 23 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। करीब 300 मीटर दूरी पर पिरौना पुलिस चौकी के पीछे चल रही नकली खाद फैक्ट्री के खुलासे के बाद भी अब तक शेष नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
*एफआईआर होने के बावजूद कार्रवाई ठप*
जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने 14 अक्टूबर को सात नामजद लोगों के खिलाफ एट कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। इससे पहले 13 अक्टूबर को सीओ कोंच परमेश्वर प्रसाद और एसडीएम कोंच ज्योति सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने पिरौना चौकी के पीछे छापा मारा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 102 बोरी डीएपी, 58 बोरी जिप्सम, 200 खाली बोरियां, सिलाई मशीन, जनरेटर और खाद बनाने के उपकरण बरामद किए थे। लेकिन आरोपी गाड़ी की आवाज़ सुनकर भाग निकले।
*स्थानीय पुलिस की मिलीभगत की आशंका*
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह नकली खाद का कारोबार लंबे समय से पुलिस चौकी के नज़दीक चल रहा था, जिससे स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि नामजद मुकदमा दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस जानबूझकर कार्रवाई से बच रही है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह कारोबार स्थानीय पुलिस की मिलीभगत और संरक्षण में कई दिनों से फलफूल रहा था।
*क्या सफेदपोशों की सिफारिश से ठंडी पड़ी कार्रवाई*
ग्रामीणों में चर्चा है कि इस अवैध कारोबार में कुछ स्थानीय सफेदपोश नेताओं की भी मिलीभगत रही है। प्रशासन की सक्रियता के बाद जैसे ही मामला उजागर हुआ, वैसे ही रसूखदार लोगों की सिफारिशें शुरू हो गईं। नतीजा यह कि 23 दिन बीत जाने के बावजूद एक गिरफ्तारी के सिवा अभी तक शेष नामजद लोगों की गिरफ्तारी आखिर क्यों नहीं हुई.?
*सोलर स्ट्रीट लाइट से हुआ बड़ा खुलासा*
जांच में यह भी सामने आया कि जिस खंडहर पड़े प्लांट में नकली खाद बनाई जा रही थी, वहां सोलर स्ट्रीट लाइट हाल ही में लगाई गई थी।
यह लाइट पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम उन्नति योजना के तहत यूपी नेडा विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में गांव के लिए स्वीकृत थी, लेकिन ग्राम प्रधान ने इसे अपने निजी प्लांट परिसर में लगवा दिया। इससे रात के समय नकली खाद बनाने का काम आसानी से होता रहा।
*ग्रामीणों में आक्रोश, स्थानीय प्रशासन मौन*
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के विकास के नाम पर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया गया। वहीं, प्रशासन और पुलिस दोनों ही अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब चौकी से मात्र 300 मीटर की दूरी पर यह नकली खाद बनाने वाली फैक्ट्री चल रही थी, तो आखिरकार पुलिस को इसकी भनक कैसे नहीं लगी?
*ग्रामीणों के सवाल जो अब भी बाकी हैं*
1. एफआईआर के 23 दिन बाद भी शेष 6 आरोपी क्यों नहीं पकड़े गए?
2. क्या स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से बच रहे हैं खाद माफिया?
3. आखिर ग्राम प्रधान के निजी प्लांट में सरकारी सोलर लाइट लगने पर जांच क्यों नहीं हुई?