भारत माता और प्राचीन गणेश मंदिर का है वर्षों पुराना इतिहास
जालौन : ० कोंच तहसील कार्यालय के नजदीक ही स्थित जनपद के इकलौते भारत माता मंदिर का शिलान्यास ओनरेरी मैजिस्ट्रेट रहे गणेश प्रसाद पाठक ने अपनी दिवंगत माँ की पुण्य स्मृति में 25 मार्च 1953 में कराया था। इसके करीब 65 वर्ष बाद जनवरी 2018 में संघ से जुड़ी शिशु कल्याण समिति ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। यहां पर प्रात: काल संघ की शाखा भी वर्षों लगती रही। मंदिर में पूरब दिशा में भारत माता की प्रतिमा स्थापित है जबकि पश्चिम में भुमिया माता प्रतिष्ठापित हैं। पुरानी मान्यता है कि यहां भुमिया माता को जो सुहागन स्त्री श्रंगार का सामान और नारियल अर्पित करती हैं, भुमिया माता उस स्त्री के पति के जीवन की रक्षा स्वयं करती हैं इसलिए शादी के तुरंत बाद ही वर-वधु मंदिर में आकर रोली-सिंदूर अपनी हथेली में लगाकर देवी माँ के सामने दीवार पर हथेली में लगा सिंदूर-रोली उकेरती हैं। समय के साथ मंदिर सहित परिसर की हालत खस्ता होती रही। वर्षों पुरानी बाउंड्रीवाल टूट कर धराशाई हो गयी, साथ ही परिसर भी ऊबड़-खाबड़ होता गया। जगह-जगह झाड़ झक्कड़ हो गए और मंदिर भवन भी यहां वहाँ से क्षतिग्रस्त हो गया। यहां पर न बैठने की कोई व्यवस्था रही और न ही पीने के पानी की। प्रकाश व्यवस्था के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी देवी माँ के ही भरोसे है।
श्रीगणेश मंदिर गढ़ी का इतिहास भी प्राचीन है। इतिहासकार बताते हैं कि गढ़ी बुर्ज पर अवस्थित मंदिर में गणेश प्रतिमा का शिल्पांकन नवीं शताब्दी में चंदेल नरेश ने कराया था। मूर्ति शास्त्र के अनुसार नृत्य विनायक गणेश की सबसे लोकप्रिय, अद्वितीय प्रतिमा यहां मंदिर में प्रतिष्ठापित है। यहां पर हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर विविध धार्मिक आयोजनों के साथ ही मेला लगता है। मंदिर भवन को यदि छोड़ दें तो मंदिर के परिसर में सुन्दरता की कोई पहचान नहीं है।