एनजीटी ने पहूज नदी में अवैध निर्माण और प्रदूषण पर लिया कड़ा रुख, MPPCB ने उनाव बालाजी धाम में शुरू की जांच
झांसी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान पीठ नई दिल्ली ने बुंदेलखंड की जीवनरेखा मानी जाने वाली पहूज नदी में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, प्रदूषण और प्राकृतिक जलमार्गों को अवरुद्ध किए जाने के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया है। माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने केसर सिंह, नरेन्द्र कुशवाहा, पंकज रावत, प्रवीण कुमार पाण्डेय, ओमप्रकाश सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दर्ज मूल आवेदन संख्या 323/2026 पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया है, जिसकी अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को तय की गई है। प्राचीन ग्रंथों में पुष्पावती नाम से प्रसिद्ध और सिंध की सहायक यह नदी मध्य प्रदेश के शिवपुरी से निकलकर लगभग 265 किलोमीटर का सफर तय करती है, जो बुंदेलखंड के जल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद अहम है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के दतिया जनपद स्थित धार्मिक स्थल उनाव में प्रशासन द्वारा नदी के डूब क्षेत्र में नियमविरुद्ध कंक्रीट निर्माण कराया जा रहा है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही दतिया के उनाव, भाण्डेर तथा उत्तर प्रदेश के झांसी व जालौन जिलों के तमाम गांवों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्राकृतिक नालों और फीडर चैनलों पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण किया जा रहा है और इनमें सीवेज का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे प्रदूषित जल सीधे पहूज नदी में मिलकर उसकी जलीय पारिस्थितिकी को नष्ट कर रहा है। उनाव स्थित पहूज नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी काफी गहरा है, जहां श्रद्धालु नदी में स्नान कर भगवान सूर्य बालाजी को जल अर्पित करते हैं और मान्यता के अनुसार इस जल के औषधीय गुणों से चर्म रोग ठीक होते हैं, लेकिन वर्तमान गतिविधियों से इस पारंपरिक महत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। अधिकरण के समक्ष याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्माण और प्रदूषण की तस्वीरें भी पेश की गईं, जिस पर कोर्ट ने प्रतिवादियों को अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने को कहा है। इस कानूनी कार्रवाई के बीच आज 14 जून को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर की टीम ने उनाव बालाजी धाम पहुंचकर पहूज नदी पर चल रहे निर्माण कार्य, जलकुंभी, आसपास के नालों और डंपिंग साइट का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया, जिसमें क्षेत्रीय अधिकारी श्री डी.वी.एस. जाटव एवं सहायक अभियंता विशाल पाण्डेय शामिल थे। एमपीपीसीबी की ओर से सहायक अभियंता विशाल पाण्डेय ने इस जांच के लिए आवेदक से संपर्क किया था, परंतु व्यस्तता के कारण आवेदक के मौके पर न पहुंचने पर उन्हें फोन द्वारा पूरी कार्रवाई की जानकारी दी गई। बोर्ड की टीम ने निरीक्षण के दौरान प्रभावित स्थलों की जांच कर तस्वीरें ली हैं, जिनकी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी के समक्ष दाखिल की जाएगी। हालांकि, मौके पर मौजूद आवेदक के प्रतिनिधि ने बताया कि निरीक्षण टीम के साथ स्थानीय सरपंच लक्ष्मण वर्मा भी शामिल थे, जिनके कथित प्रभाव में आकर टीम ने केवल मंदिर के ऊपर से फोटोग्राफ लिए और कुछ ही जगहों पर स्थल पर गए, जबकि नदी क्षेत्र के कई अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण नहीं किया गया और न ही उनके फोटोग्राफ लिए गए।