झांसी में आयुष्मान योजना पर सवाल: स्मार्ट सिटी अस्पताल पर अवैध वसूली और फर्जी जांच का आरोप
झांसी। जनपद में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों को बार-बार बाहर से जांच कराने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि कुछ जांचें वास्तविक रूप से कराए बिना ही कागजों में दर्शाकर योजना के तहत भुगतान लेने की साजिश की जा रही है।
शिकायतकर्ता नरेन्द्र कुशवाहा के अनुसार, उनके 75 वर्षीय पिता के उपचार के दौरान अस्पताल स्टाफ द्वारा एक जांच के लिए पहले 10,000 रुपये जमा करने को कहा गया, जबकि आयुष्मान योजना के अंतर्गत यह सुविधा निःशुल्क होनी चाहिए थी। बताया गया कि संबंधित डॉक्टर के अवकाश पर होने का हवाला देकर बाहर से डॉक्टर बुलाने के नाम पर पैसे मांगे गए। आर्थिक तंगी के चलते राशि न देने पर मरीज को डिस्चार्ज करने का दबाव बनाया गया। बाद में रुपए जमा करने के बावजूद अस्पताल द्वारा कोई बिल या रसीद नहीं दी गई। जब परिजनों ने संबंधित जांच के बिल और रिपोर्ट मांगी, तो अस्पताल प्रशासन ने टालमटोल करते हुए केवल अधूरी फोटोकॉपी उपलब्ध कराई, जिससे पूरे प्रकरण पर संदेह और गहरा हो गया।
मरीज क्यों नहीं कर पाते शिकायत?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आर्थिक दबाव और इलाज रुकने के डर से उन्हें कई बार पैसे जमा कराने के लिए मजबूर किया गया। यही कारण है कि अधिकांश गरीब मरीज ऐसी परिस्थितियों में शिकायत करने का साहस नहीं जुटा पाते और शोषण सहने को विवश रहते हैं।
“योजनाओं की मंशा के विपरीत हो रहा कार्य”
नरेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा गरीबों को निःशुल्क और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान कार्ड जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं, जो सराहनीय हैं। साथ ही स्मार्ट सिटी अस्पताल के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन कुछ अस्पताल कर्मियों द्वारा इन योजनाओं की मंशा के विपरीत कार्य करते हुए आयुष्मान कार्ड के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों से न केवल सरकार की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी कमजोर पड़ रहा है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
जिलाधिकारी ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को निर्देशित किया है कि प्रकरण की नियमानुसार जांच कर शीघ्र आख्या प्रस्तुत करें।
(प्रेषक)
नरेन्द्र कुशवाहा
मो. 9452041529