IGRS में दर्ज की गई है कोई भी कर्मचारी-कर्मचारी खराब कर रही है योगी सरकार की नियंत्रण व्यवस्था की छवि
विदाई, 20 मई। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लागू जनसुनवाई/समाधान (आईजीआरएस) पोर्टल की अनदेखी कर आवेदन में कर्मचारी-अधिकारी सरकार की व्यवस्था पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासनादेश के संविधान आईजीआरएस पोर्टल पर नामांकित गंभीर याचिका नेताओं को दर्ज नहीं किया गया है। पर्यावरण एवं पर्यावरण-सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया है कि यह कार्यशैली न केवल शासन के अस्पष्ट स्थापित होने की है, बल्कि इससे मुख्यमंत्री एवं जवाबदेह प्रशासन की छवि भी धूमिल हो रही है।
उन्होंने बताया कि 17 फरवरी 2020 को जारी शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी सम्मिलित अभ्यर्थियों को अनिवार्य रूप से आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज किया जाए, जिससे उनके प्रकरण की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सके और प्रमाण पत्र जारी किया जा सके। इसके बावजूद गंभीर संगीत को पोर्टल पर दर्ज न करके सीधे निस्तारित ऑर्बिट रखा जा रहा है।
आरोप है कि 14 मई 2026 और 11 मई 2026 को प्रस्तुत कलाकारों में गंभीर प्रतिभागियों और कथित कुटरचित आख्या के माध्यम से याचिका दायर की गई थी, लेकिन इन वादों को पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया था।
उन्होंने नामांकन से मांग की है कि अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि मुख्यमंत्री की शून्य सहनशक्ति और अनुशासन प्रशासन की नीति पर जनता का विश्वास बनाया जा सके।
इस एपिसोड में स्थानीय प्रशासन की समीक्षा पर सवाल उठाए गए हैं और यह चर्चा तेज हो गई है कि जगह-जगह कर्मचारी कर्मचारियों की योगी सरकार की सुशासन की छवि को नुकसान नहीं पहुंच रहा है।