*“दादा-दादी बने छात्र” — जालौन में बुजुर्गों ने थामा किताबों का हाथ*
जालौन जनपद के ग्राम छानी से एक बेहद प्रेरणादायक और दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंचे बुजुर्गों ने फिर से स्कूल का रुख कर नई मिसाल कायम कर दी। गांव के आधा दर्जन बुजुर्गों ने स्कूल में प्रवेश लेकर यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
अब गांव के बच्चे ही नहीं, बल्कि उनके दादा-दादी भी पाठशाला में बैठकर पढ़ाई करते नजर आएंगे। बच्चों के साथ कक्षा में बैठे बुजुर्गों के चेहरे पर सीखने की खुशी साफ झलक रही थी। वहीं बच्चों में भी खास उत्साह देखने को मिला।
यह अनोखी और सराहनीय पहल एसडीएम IAS रिंकू सिंह राही द्वारा शुरू की गई है। इस अभियान का उद्देश्य उन बुजुर्गों को शिक्षित करना है, जो किसी कारणवश बचपन में पढ़ाई नहीं कर सके थे।
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे सिर्फ अंगूठा नहीं लगाएंगे, बल्कि अपने दस्तखत भी करेंगे। गांव में इस पहल की जमकर सराहना हो रही है और लोग इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं।
शिक्षा की इस नई अलख ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर सीखने का जज्बा हो, तो उम्र कभी भी रास्ता नहीं रोक सकती।