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आखिर कैसे सुर्खियों में आई जालौन के इस स्कूल की मिड डे मील की थाली, जानिए खास वजह

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Sep 3, 2022

आखिर कैसे सुर्खियों में आई जालौन के इस स्कूल की मिड डे मील की थाली, जानिए खास वजह

जालौन:_जालौन में इन दिनों सोशल मीडिया पर मिड डे मील की थाली लगातार सुर्खियों में हैं लोग सोशल मीडिया पर स्कूली बच्चों की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। जिसके बाद जालौन का मलकपुरा गांव और यहां के प्रधान सुर्खियों में आ गए। ग्राम प्रधान ने सरकार के द्वारा संचालित मिड-डे-मील को मॉडिफाई कर उसमें ऐड ऑन का ऑप्शन कर दिया है जिसके बाद बच्चों को उनका मनपसंद खाना दिया जा रहा है और इस खाने में पनीर-पूरी, सेव, केला मिल्क शेक, रसगुल्ला मिठाई के साथ बहुत कुछ है और थाली की यह तस्वीर बयां करती है कि किस तरह से एक नई सोच के साथ स्कूल ही नहीं देश की दिशा बदल सकती है।

बता दें कि पूरा मामला जालौन के मलकपुरा ग्राम का है जहां पर है ग्राम प्रधान के पॉजिटिव सोच ने मिड डे मील की तस्वीर बदल दी। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना हुनर आजमाने के बाद 2021 अमित ने मलकपुरा गांव की कमान संभाली और इसके बाद लगातार गांव और स्कूल को दशा बदलने का प्रयास कर रहे हैं। इस दिशा में उन्होंने काफी रिसर्च किया। जिसके बाद गुजरात राज्य में लागू तिथि मॉडल को अपने स्कूल में लागू कर बच्चों के मिड डे मील को मॉडिफाई कर उसमें ऐड ऑन का ऑप्शन जोड़ दिया। इस ऑप्शन के तहत कोई भी व्यक्ति स्कूल में अपनी स्वेच्छा से भागीदारी से मिड डे मील में अपनी पसंद का खाना दे सकता है। जिसका फायदा यह हुआ कि स्कूली बच्चों को अब महीने में 2 से 4 बार मटर पनीर, छोले, पूरी, मिठाई, मिल्क शेक, पाइनएप्पल जूस, केला और लड्डू खाने को मिलता है उनके इस काम की तारीफ सोशल मीडिया पर जमकर हो रही है। वहीं छात्रों ने बताया कि हमें महीने में दो से चार ये  सारी चीजें खाने को मिलती है। 

गांव के प्रधान अमित ने बताया कि स्कूल में मिड डे मील विधिवत तरीके से संचालित किया जा रहा है लेकिन गुजरात के मॉडल को अपनाते हुए हमने स्कूल में तिथि मॉडल को लागू कर मिल में ऐड ऑन का ऑप्शन जोड़ दिया है इस ऑप्शन की मदद से बच्चों को तरह-तरह के भोजन खाने को मिलते हैं वही जन सहभागिता और लोगों की मदद से यह सब संभव हो पा रहा है। बच्चों के तकनीकी शिक्षा को लेकर कई सारे बदलाव किए जा रहे हैं बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा से लेकर स्पोर्ट्स के मैदान में भी तैयार किया जा रहा है।

रविकांत द्विवेदी, जालौन-यूपी

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