*समर एकेडमिक इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत कानून के छात्रों को जिला करागार यात्रा आयोजित की गई*
*अपर जिला न्यायाधीश ने साझा किया सामान्य विधिक अनुभव*
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झाँसी। जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकारी, झाँसी श्रीमती कमलेश कच्छल जी के कुशल संरक्षण एवं प्रेरणा प्रोत्साहन एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकारी, श्रीमती ईशा तृतीय जी के कुशल संरक्षण एवं प्रेरणा प्रोत्साहन हेतु ‘समर एकेडमिक इंटर्नशिप प्रोग्राम’ के अंतर्गत आज एल.एल.बी. एवं एल.एल.एम. छात्र-छात्रों (इंटर्न्स) आंदोलन के एक महत्वपूर्ण एवं ज्ञान अभ्यास सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को वैधानिक कानूनी प्रक्रिया एवं सुधारात्मक न्याय प्रणाली का अनुभव प्रदान करना।
प्रोग्राम के प्रथम चरण में इंटर्न्स को जिला कारागार, झाँसी का विस्तृत स्टार्टअप टूर शुरू किया गया। इस दौरान छात्रों-आदिवासियों ने जेल की व्यवस्था, बंदियों के जीवधारियों, रहन-सहन, चिकित्सा सुविधाओं एवं बैरकों का अध्ययन किया। साथ ही, उन्हें इस बात पर भी विश्वास है कि जिला सेवा प्राधिकारी किस प्रकार की जेल में निरुद्ध और अमीरों के आर्थिक रूप से फ्राड बंदियों को मुफ्त विधिक सहायता प्रदान करते हैं, जो सरकारी खर्च पर प्रदान करते हैं और उनकी विधिक शक्तियों की रक्षा करते हैं।
जेल यात्रा की शुरूआत अपर जिला जज श्री शरद कुमार चौधरी द्वारा इंटर्न के साथ एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया। संवाद की शुरुआत करते हुए उन्होंने कानून की मूल भावना को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि “कानून सामान्य ज्ञान के अलावा और कुछ नहीं है” यानी कानून की व्यावहारिक सामान्य समझ का ही विस्तृत स्वरूप है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि कानून की कसौटी को व्यावहारिक बुद्धि एवं सामान्य समझ के साथ समझा जाए तो न्याय की प्रक्रिया को सहज रूप से स्थापित किया जा सकता है।
निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों में जिज्ञासु क्रिटिकल थिंकिंग विकसित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी विधिक विषय या मामले को केवल सतही या शास्त्रीय दृष्टिकोण से न देखकर उसके गहराई में आधारभूत आधार, व्यावहारिक एवं संवैधानिक आधार पर विश्लेषण करना चाहिए।
संवाद सत्र के दौरान छात्र-छात्रों द्वारा कोर्टीन सैटलिनेट, विशिष्ट अधिनियम की अंतिम पंक्ति एवं वादी से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए। निर्णायक न्यायाधीश द्वारा सभी जिज्ञासाओं का सरल, सूक्ष्म एवं प्रभावशाली उदाहरणों के माध्यम से समाधान करते हुए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया गया, जिससे विद्यार्थी-छात्रों में विधिक ज्ञान के प्रति उत्साह एवं संचार का संचार हुआ।