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17922कृषि विभाग के भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा के वर्षा सिंचित क्षेत्र विकास कार्यक्रम

ByNeeraj sahu

Oct 28, 2024

कृषि विभाग के भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा के वर्षा सिंचित क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय सतत कृषि विज्ञान, परियोजना रौरा, विकास खंड चिरगांव की प्रगति एवं उपयोगिता उपयोगिता का जायजा लेने के लिए डा० ओ०बी० शर्मा, एडिशनल कमिश्नर (एन.आर. एम. / आर. एक एस.), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भ्रमण किया गया। योजना के बारे में कृषकों के साथ चर्चा करते हुए उनके बरा बताया गया कि समन्वित कृषि पद्धति को अपनाते हुए फ विविधीकरण, नया बहुआयामी कृषि को अपनाये जाने का है। उनके द्वारा कृषकों को सलाह दी गयी कि कृषि के साथ, पशुपालन, मुर्गीपालन पालन उद्यानीका तथा बनकरण के तहत आदि कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे कृषकों को पूरे साल अधिक आय प्राप्त हो सके। उनके द्वारा रेलखण्ड क्षेत्र के लिए अनुकूल वृक्षों को रोपण किये जाने हेतु विशेष जोर दिया गया। उनके द्वारा बताया गया कि कृषकों को वृक्षारोपण का लाभ भविष्य में कार्बन क्रेडिट के आधार पर प्रोत्साहन धनराशि को सरकार द्वारा दी जा सकती है। मूल्य संवर्धन घटक के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने बुलाया कि किसान आय को रासायनिक को था जरूरीले कृषि रक्षा रसायनों के प्रयोग के बजाय अपने खेत में केचुए की खाद, गोबर की खाद, तथा हरी खाद का अधिक प्रयोग करना चाहिए, जिससे मिट्टी और फसल भी गुणवता अच्छी एक सके। बैठक के उपरांत उनके द्वारा अनुदान पर दी गये पशुधन (गाय, भैंस) का भी निरीक्षण किया गया।
बाद में उनके द्वारा लच्छीराम पुत्र राम प्रसाद के खेहाभाव का भी निरीक्षण किया गया। प्रधानमंत्री सिचाई योजनान्तर्गतवर्ष 2019-20 में खोदे गये तालाब में पानी पूरा भरा हुआ पाया गया जिस पर कृषक द्वारा मछली पालन भी किया जा रहा है। कृषक द्वारा बताया गया कि उसने 14000 रूपये का मछली बीज तालाब में डाला था, जिससे एक साल में लगभग 03 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। योजनाओं की प्रगति की प्रसंशा प्रशंसा की गयी, उन्होंने बताया कि बुंदेलखण्ड के कृषको खुशहाली और उनकी आग में बढोतरी करना सरकार की प्राथमिकता में है।

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