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कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी में आयोजित हुई कृषि वानिकी प्रोत्साहन गोष्ठी

ByNeeraj sahu

Oct 8, 2024

** कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान
झांसी में आयोजित हुई कृषि वानिकी प्रोत्साहन गोष्ठी

** प्रदेश के वन क्षेत्र के बाहर कृषि भूमि पर भी होगा वृक्षारोपण, कृषि वानिकी अत्यंत लाभकारी एवं महत्वपूर्ण

** कृषि वानिकी पर्यावरण के लिए अत्यंत अनुकूल लाभदायक

** सीमांत कृषकों को अपनी भूमि पर आंवला जामुन कटहल बांस इमली जैसी प्रजाति लगाए जाने का सुझाव

आज प्रदेश स्तरीय कृषि वानिकी प्रोत्साहन गोष्ठी का आयोजन केन्द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी में किया गया।
इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उ०प्र० विभाग एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती ममता संजीव दुबे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, उ०प्र० लखनऊ द्वारा प्रतिभाग किया गया। गोष्ठी में मुख्यालय से संजय श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, एच० राजामोहन, मुख्य वन संरक्षक, नियोजन, उ०प्र० लखनऊ एवं निदेशक, केन्द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी, संस्थान के वैज्ञानिक, बुन्देलखण्ड जोन के समस्त अधिकारी/कर्मचारी, कृषक आदि भी मौजूद रहे।
गोष्ठी में सर्वप्रथम के0के0 सिंह, मुख्य वन संरक्षक, बुन्देलखण्ड जोन, झांसी ने प्रदेश स्तरीय कृषि वानिकी प्रोत्साहन गोष्ठी में पधारे समस्त प्रतिभागियों का स्वागत किया गया। तदोपरान्त उनके द्वारा गोष्ठी आयोजित कराये जाने के उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताते हुये बुन्देलखण्ड एवं सम्पूर्ण प्रदेश में वन क्षेत्र के बाहर कृषि भूमि पर भी वृक्षारोपण कर वनावरण बढ़ाये जाने के बारे में प्रकाश डालते हुये कृषि वानिकी को अत्यन्त लाभकारी एवं महत्वपूर्ण बताया।
विशिष्ट अतिथि प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, उ०प्र० लखनऊ द्वारा कृषि वानिकी को कृषि फसलों के साथ-साथ किसानों को स्थानीय प्रजातियां लगाकर आय दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उ०प्र० विभाग द्वारा बताया गया कि कृषि वानिकी की अवधारणा प्रदेश में वन क्षेत्र के बाहर हरीतिमा बढ़ाये जाने हेतु एक कारगर कदम होने के साथ-साथ कृषकों को उनकी एग्रोक्लाइमेटिक जोन के अनुसार एवं तीव्र गति से बढ़ने वाले वृक्षों का रोपण कर अतिरिक्त आय प्राप्त करने का साधन है।
डॉ० एच० राजामोहन, मुख्य वन संरक्षक, प्रशासन उ०प्र० लखनऊ द्वारा प्रदेश हेतु कृषि वानिकी नीति का ड्राफ्ट प्रस्तुत करते हुये कृषि वानिकी को पर्यावरण के लिये अत्यन्त अनुकूल, लाभदायक, प्रकाष्ठ आधारित उद्योगों से रोजगारपरक होने तथा प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के लिये उपयोगी बताया।
संजय श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा प्रदेश में वन विभाग द्वारा अपनायी गयी रणनीति पर चर्चा करते हुये बताया गया कि पूरे प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में वृहद वृक्षारोपण योजना के तहत वनावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया गया है तथा कृषि वानिकी नीति लागू होने से प्रदेश के वनावरण में और वृद्धि होगी तथा इस योजना के तहत प्रत्येक न्याय पंचायत में एक पौधशाला विकसित की जायेगी तथा प्रत्येक ग्राम में सीमान्त कृषकों द्वारा अपनी भूमि पर आंवला, यूकेलिप्टस, जामुन, कटहल, बांस, इमली जैसी प्रजातियां लगायी जा सकेंगीं ।
केन्द्रीय कृषि वानिकी संस्थान, झांसी के डायरेक्टर डॉ० ए० अरुणाचलम द्वारा बताया गया कि उनका संस्थान कृषि वानिकी को पूरे देश में प्रसार करने के उद्देश्य से बनाया गया है। संस्थान में आयोजित उक्त प्रदेश स्तरीय कृषि वानिकी प्रोत्साहन गोष्ठी से पूरे बुन्देलखण्ड क्षेत्र एवं प्रदेश में कृषि वानिकी के वृहद प्रचार-प्रसार एवं वन विभाग के बाहर स्थित भूमि पर वृक्षारोपण कराये जाने हेतु संस्थान के वैज्ञानिकों से तकनीकी एवं उपयोगी जानकारी प्राप्त होगी, जिसका लाभ पूरे प्रदेश को मिलेगा । इस कार्य हेतु संस्थान नवाचार एवं तकनीकी क्षेत्र में कृषकों एवं स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिये हमेशा अग्रसर है।
गोष्ठी में आये विभिन्न वैज्ञानिकों, कृषि वानिकी के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को कृषि वानिकी के विभिन्न पहलुओं जैसे कृषि वानिकी व्यवस्था से कृषकों को होने वाले आर्थिक लाभों प्रदेश के कुल वनावरण में होने वाली वृद्धि, हरीतिमा विकास, आम जनमानस के प्रकाष्ठ आधारित आवश्यकताओं की आपूर्ति एवं काष्ठ आधारित औद्योगीकरण को बढ़ावा, हर क्षेत्र की जलवायु के अनुसार वहां की स्थानीय प्रजातियों के रोपण किये जाने आदि के बारे में विस्तार से बताया गया ।
गोष्ठी के अन्त में वन संरक्षक, चित्रकूटधाम वृत्त बांदा द्वारा गोष्ठी में पधारे समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों, कृषकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
गोष्ठी में वन संरक्षक, बुन्देलखण्ड वृत्त झांसी, प्रभागीय वनाधिकारी झांसी, महोबा, हमीरपुर, उरई एवं समस्त उप प्रभागीय वनाधिकारीगण, समस्त क्षेत्रीय वनाधिकारीगण एवं स्टाफ आदि उपस्थित रहे।
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