सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने जांच अधिकारी DGME के एडिशनल डायरेक्टर के खिलाफ खोला मोर्चा, कहा CM से मिलकर ऐसे अधिकारी की करेंगे शिकायत,रविकांत द्विवेदी, जालौन यूपी
जालौन में भाजपा के सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने डीजीएमई के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. मुकेश यादव और राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर के मौर्या के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दरअसल, डीजीएमई के एडिशनल डायरेक्टर ने बुधवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण करने के दौरान सदर विधायक पर तंज कसा था और कहा था जनता का वोट लेने के लिए विधायक द्वारा शिकायत की गई। उनके द्वारा शिकायत नहीं की जाएगी तो जनता उन्हें वोट नहीं देगी। इसी बयान के बाद भाजपा विधायक ने पत्रकारों से वार्ता की।
उन्होंने कहा कि 13 जुलाई के विधानसभा में प्राक्कलन समिति की बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में प्राक्कलन समिति के सदस्य होने के कारण मौजूद था। जिसमें उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा के प्रमुख सचिव सहित पीजीआई और अन्य बड़े मेडिकल के अधिकारी मौजूद थे। बैठक में उन्होंने कहा था कि उरई मेडिकल कॉलेज करोड़ों रुपए से बना है, मगर मेडिकल कॉलेज अभी भी अन्य सुविधाओं से वंचित है। जिसके लिये लगातार विधानसभा में याचिका के माध्यम से सीटी स्कैन मशीन और एमआरआई मशीन स्थापित हो ट्रामा सेंटर स्थापित हो। वहां एमबीबीएस के जो 70 फीसदी छात्र एससी कोटा के एडमिशन लेते हैं, उनको पढ़ाने के लिए नियुक्त प्रोफेसर नियमित रूप से मेडिकल कॉलेज में रहें।
जिससे उनको अच्छी शिक्षा मिले। इसके अलावा कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज में तमाम सुविधाएं मिली। जिसके लिए राष्ट्रपति द्वारा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य और अन्य डॉक्टरों को सम्मानित किया गया था, लेकिन 3 साल होने के कारण प्रिंसिपल को स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद नियमित मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल की मांग की गई, उनकी मांग यह थी कि यदि मेडिकल कॉलेज में नियमित प्रिंसिपल रहेंगे तो बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई और यहां आने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सा मिलेगी और इमरजेंसी की स्थिति सुधरेगी। सदर
विधायक ने कहा कि उनकी मांग पर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर आर के मौर्या को प्रधानाचार्य बनाकर भेजा गया। मगर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य नियमित रूप से मेडिकल कॉलेज में नहीं रुक रहे हैं। वह अपना काकादेव कानपुर में बने स्वराज नर्सिंग होम को देखने में व्यस्त रहते हैं और अपना पूरा समय कानपुर में बने नर्सिंग होम को देते हैं। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड धारकों को सही से इलाज की सुविधा नहीं मिल रही। उन्हें बाहर की दवा लिखी जा रही। इसके अलावा मरीज से दुर्व्यवहार किया जा रहा है। रात के समय डॉक्टर मेडिकल में मौजूद नहीं रहते हैं और मेडिकल कॉलेज में सभी मशीन होने के बावजूद भी डॉक्टर द्वारा बाहर की जांच लिखी जा रही थी। इन सभी मुद्दों को उनके द्वारा बैठक में शिकायत की गई थी।
जिसकी जांच करने के लिए डीजीएमई के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. मुकेश यादव 26 जुलाई को उरई मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जिन बिंदुओं को उन्होंने लिखा था, उन बिंदुओं पर जांच न करते हुए एक वार्ड में जाकर 1 घंटे के अंदर घूमकर लखनऊ वापस चले गए। उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया, बल्कि उन्होंने टिप्पणी की जनप्रतिनिधि का काम शिकायत करना है, क्योंकि उन्हें जनता का वोट लेना है। इस मुद्दे पर भाजपा के सदर विधायक ने कहा कि वह जनता से चुने जनप्रतिनिधि हैं, उनका काम है कि यहां के लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दी जा सके। वह मेडिकल कॉलेज में ज्यादा से ज्यादा सुविधा दिलाने चाह रहे हैं, जिससे मरीजों को बाहर रेफर न होना पड़े, मगर एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा इस तरीके का गैर जिम्मेदार न बयान उनकी बुद्धि क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।
उन्होंने कहा कि वह अपने अधिवक्ता तथा पार्टी के पदाधिकारी से इस मामले में सलाह लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराएंगे। जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। साथ ही इस मुद्दे को लेकर वह मुख्यमंत्री जी से भी मुलाकात करेंगे। जिससे ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो सके। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य काम है कि जालौन के करोड़ों रुपए के मेडिकल कॉलेज में बेहतर से बेहतर सुविधाएं मिल सके। इसके लिए वह लगातार प्रयास करते रहेंगे।
रविकांत द्विवेदी, जालौन यूपी