मानवीय मूल्यों जीवन में बनाए रखने की आवश्यकता :हरगोविंद कुशवाहा
ऐसा लिखो जिसे लोग याद करें या कार्य करो जिसे लोग लिखें:रवि शर्मा
कवि नासिर अली नदीम जालौन को 11हजार एवं राम शब्द बेनूर लखनऊ को 51सौ से किया गया सम्मानित
कवि सम्मेलन में कवियों किया श्रेष्ठ काव्य पाठ
मुख्य अतिथि,नगर विधायक रवि शर्मा, राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा रहे
झाँसी।साहित्यिक संस्था संकल्प झाँसी एवं उत्तर प्रदेश साहित्य सभा झाँसी के संयुक्त तत्त्वावधान में रविवार को राजकीय संग्रहालय में सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। समारोह के मुख्य अतिथि
नागर विधायक रवि शर्मा, एवं दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री साहित्य मर्मज्ञ हरगोविंद कुशवाहा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के सुपौत्र इंजीनियर सौरभ गुप्ता ने की। समारोह में जालौन के कवि नासिर अली “नदीम” कृत मुक्तक संग्रह “मन भी मिले” पर परिचर्चा हुई ।
समारोह में अन्य अतिथियों में संत राम पेंटर,अनिल शर्मा वरिष्ठ पत्रकार जालौन, के पी सिंह वरिष्ठ पत्रकार उरई, विनोद भावुक वरिष्ठ साहित्यकार लखनऊ।डा. रेनु चन्द्रा – वरिष्ठ साहित्यकार उरई, गिरधर खरे वरिष्ठ साहित्यकार रहे।समारोह में 11हजार का सम्मान कीर्ति शेष जनकवि नाथूराम साहू “कक्का” स्मृति सम्मान 2026 नासिर अली (नदीम) जालौन को एवं 5100 का कीर्ति शेष सुकवि अशित मित्तल स्मृति सम्मान-2026 राम शब्द (बेनूर) लखनऊ को नगर विधायक रवि शर्मा एवं राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने किया। समारोह में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के नव नियुक्त जिला संयोजक रिपुसूदन नामदेव को अतिथियों ने सम्मानित किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए नगर विधायक रवि शर्मा ने कहा कि या तो इस तरह लिखा जाये कि आने वाली पीढ़ी याद करे या ऐसा कार्य किया जाय जिन पर लोग लिखें।उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया जाये. साहित्यकार और बुद्धिजीवी कुरीतियों और सामाजिक विसंगतियों को दूर करें। मुख्यअतिथि दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने साहित्यकारों और कवियों को सम्मानित किया जाये।उन्होंने अनेक उदारण देकर बताया कि महाराज छत्रसाल ने कवि भूषण की पालकी में कंधा दिया था। उन्होंने मानवीय मूल्योंको अपने जीवन में बनाये रखने का आह्वान किया।अध्यक्षता करते राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त के पौत्र इंजीनियर सौरभ गुप्त ने नदीम जी मुक्तक संग्रह मन भी मिले पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके लेखन में वेदना में उपजी सूफ़ी तरंग है
इसमें भावों का सुन्दर समन्वय है। उन्होंने कहा कि परिचर्चा साहित्य को नई दृस्टि से समझने का प्रयास करती है। लखनऊ से आये कवि गिरधर खरे, विनोद गुप्त भावुक ने नदीम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की। इस अवसर पर साहित्य सभा के जिलाअध्यक्ष सी वी राय तरुण, मण्डल संयोजक सत्य प्रकाश ताम्रकार सत्य ने स्वागत भाषण दिया।समारोह में के पी सिंह उरई,अनिल शर्मा, डॉ रेनू चंद्रा, जीतू भैया बाँदा ने साहित्य ओर वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा की। अतिथियों का स्वागत अजय साहू, पीके खरे, पी के भटनागर, संजय राष्ट्रवादी, हितेश विश्वा, डॉ मकीन सिद्दीकी, आदि ने किया।सभी सत्रों के कार्यक्रम का संचालन वैभव दुबे, अर्जुन सिंह चाँद, संजीव दुबे एवं देवेंद्र नटखट, मोनिका पाण्डेय ने सयुंक्त रूप से किया। दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। अध्यक्षता प्रताप नारायण दुबे ने की। अतिथियों में पन्ना लाल असर, डॉ सुनील तिवारी, डॉ नीति शास्त्री रहे। कवि सम्मेलन में कवियों ने श्रेष्ठ काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कवि एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे. आभार रिपु सूदन नामदेव ने किया।