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उनाव बालाजी धाम की जीवनरेखा: औषधीय आस्था वाली पहूज नदी में अवैध निर्माण एवं प्रदूषण का मामला पहुँचा एनजीटी, केंद्र व राज्यों को नोटिस

ByNeeraj sahu

May 30, 2026

उनाव बालाजी धाम की जीवनरेखा: औषधीय आस्था वाली पहूज नदी में अवैध निर्माण एवं प्रदूषण का मामला पहुँचा एनजीटी, केंद्र व राज्यों को नोटिस

नई दिल्ली/झांसी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण नदी “पहूज नदी” में कथित अवैध निर्माण, अतिक्रमण, प्रदूषण एवं प्राकृतिक जलमार्गों के अवरोध से जुड़े मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। यह मामला मूल आवेदन संख्या 323/2026 के रूप में दर्ज किया गया है, जिसकी सुनवाई 25 मई 2026 को हुई।

मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) एवं डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ द्वारा की गई। याचिकाकर्ताओं में केसर सिंह, नरेन्द्र कुशवाहा, पंकज रावत, प्रवीण कुमार पाण्डेय, चंदन एन. सिंह तथा ओम प्रकाश शामिल हैं।

याचिका में कहा गया है कि पहूज नदी, जिसे प्राचीन ग्रंथों में “पुष्पावती” के नाम से भी उल्लेखित किया गया है, सिंध नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। इसका उद्गम मध्य प्रदेश के शिवपुरी जनपद स्थित सुजावनी ग्राम के समीप होता है तथा यह लगभग 265 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के कई जनपदों से होकर बहती है। लगभग 3,648 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत यह नदी बुंदेलखंड क्षेत्र की जल सुरक्षा, भूजल पुनर्भरण एवं पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के दतिया जनपद स्थित उनाव क्षेत्र में पहूज नदी एवं उसके डूब क्षेत्र की भूमि पर स्थानीय प्रशासन द्वारा नियमविरुद्ध कंक्रीट निर्माण कार्य कराया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार यह निर्माण नदी के प्राकृतिक प्रवाह, बाढ़ क्षेत्र एवं पारिस्थितिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है।

इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश के दतिया जनपद स्थित उनाव, भाण्डेर तथा उत्तर प्रदेश के झांसी एवं जालौन जनपदों के लहरगिर्द, नयागांव, सिमरधा, पोहरा, धमना, पण्डोखर एवं नदीगांव आदि ग्रामों में राजस्व अभिलेखों में “नाला” के रूप में दर्ज प्राकृतिक जलमार्गों एवं पहूज नदी के फीडर चैनलों पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि ये प्राकृतिक नाले एवं फीडर चैनल पहूज नदी के भूजल पुनर्भरण, वर्षाजल निकासी तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, किन्तु वर्तमान में इनमें सीवेज एवं गंदे नालों का प्रवाह छोड़ा जा रहा है। इससे वर्षाजल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही है तथा प्रदूषित जल सीधे पहूज नदी में पहुँचकर नदी की जल गुणवत्ता एवं जलीय पारिस्थितिकी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि दतिया के उनाव स्थित पहूज नदी क्षेत्र का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व अत्यंत प्राचीन है। यहाँ श्रद्धालु नदी में स्नान करने के पश्चात भगवान सूर्य बालाजी को जल अर्पित करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार नदी के जल में औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिससे चर्म रोगों में लाभ होता है। याचिका में कहा गया है कि नदी क्षेत्र में किए जा रहे अवैध कंक्रीटीकरण, निर्माण कार्य एवं प्राकृतिक जलधारा में हस्तक्षेप से न केवल नदी का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो रहा है, बल्कि इसकी पारंपरिक धार्मिक, सांस्कृतिक एवं औषधीय महत्ता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से नदी तल में चल रहे कथित अवैध निर्माणों एवं प्रदूषण संबंधी फोटोग्राफ्स भी अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अधिकरण ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पूर्व शपथपत्र सहित अपना जवाब दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

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