*मौसम विभाग (आई.एम.डी.) लखनऊ द्वारा वर्षा, वज्रपात एवं आंधी-तूफान को लेकर एडवाइजरी जारी*
——————–
झांसी: अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०) ने अवगत कराया है कि वह मौसम विभाग, (आई.एम.डी.) लखनऊ द्वारा प्रभाव अधारित दिनांक 29 मई, 2026 (भा.मा.स. 14:00 बजे) द्वारा जारी प्रदेश के कतिपय जिलों में आगामी दिनों में वर्षा/अतिवृष्टि / वज्रपात (आकाशीय विद्युत) की सम्भावना व्यक्त की गई है, जिसमे जनपद झाँसी सम्मिलित है। उक्त मौसमी परिस्थितियों के प्रभाव से प्रदेश में दिनांक 29 मई से 31 मई, 2026 के दौरान मेघगर्जन / वजपात / आधी तूफान, झोकेदार हवाओं (80-90 किलोमीटर प्रति घण्टा) एवं तेज झोकेदार वर्षा के संभावना के दृष्टिगत जनपद के समस्त क्षेत्रान्तर्गत दिनांक 29 मई व 30 मई को रेड जोन तथा 30 मई से 31 मई 2026 को ऑरेंज जोन में प्रर्दशित किया गया है। आई.एम.डी. द्वारा प्राप्त पूर्वानुमान के क्रम में जनपद में वर्षों के साथ वज्रपात (आकाशीय विद्युत), मेद्य गर्जन, तड़ित झंझावत, तेज झोकेदार हवा (50-60 किलोमीटर प्रति घण्टा की सम्भावना) एवं भारी वर्षा मौसम की आगामी दिवसों हेतु चेतावनी प्राप्त हुई है।
उन्होंने बताया कि आंधी-तूफान, भारी वर्षा एवं वज्रपात से बचाव के संबंध में “क्या करें, क्या न करें” एडवाइजरी को सोशल मीडिया, प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराया जाना है. जिसका विवरण निम्नवत् हैः-
*एडवाइजरी*
आंधी-तूफान और भारी वर्षा एवं वज्रपात के दौरान ऊँची इमारतों, पेड़ों, मनुष्यों, जानवरों आदि पर बिजली गिरने की घटनाएँ होती रहती हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होता है। सावधानी और तैयारी ही एकमात्र तरीका है जिसके द्वारा वज्रपात के खतरे को कम किया जा सकता है या उसके प्रभाव से बचा जा सकता है। उक्त के अतिरिक्त विभिन्न आपदओं के जोखिम को न्यूनीकृत करने हेतु राहत एवं बचाव के कार्यों को और भी प्रभावी एवं सक्रिय किये जाने हेतु एंड्रॉयड मोबाइल फोन के प्ले स्टोर से सचेत एवं दामिनी मोबाइल एप अनिवार्य रूप से डाउनलोड कराते हुए इन मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त पूर्व की चेतावनी एवं एडवाइजरी के प्रभावी उपयोग से होने वाली क्षति को न्यूनीकृत किया जा सकता है। यदि आप खुले में हो तो शीघ्रातिशीघ्र किसी पक्के मकान में शरण लें। व्यर्थ की यात्रा से बचें। खिड़कियों, दरवाजे, बरामदे एवं छत से दूर रहे। ऐसी वस्तुएं, जो बिजली की सुचालक है, उनसे दूर रहें। बिजली के उपकरणों या तार के साथ संपर्क से बच्चे व बिजली के उपकरणों को बिजली के संपर्क से हटा दें।तालाब और जलाशयों से भी दूरी बनाये रखें। समूह में न खड़े हो, बल्कि अलग-अलग खड़े रहें। यदि आप जंगल में हो तो बोने एवं घने पेड़ों के शरण में चले जायें। बाहर रहने पर धातु से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें। बाइक, बिजली या टेलीफोन का खंभा, तार की बाड, मशीन आदि से दूर रहें। धातु से बने कृषि यंत्र डंडा आदि से अपने को दूर कर दें। आसमानी बिजली के झटके से घायल होने पर पीडित व्यक्ति को तत्काल नजदीकी प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र लें जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। स्थानीय रेडियों अन्य संचार साधनों से मौसम की जानकारी प्राप्त करते रहें।
यदि आप खेत खलिहान में काम कर रहे हो और किसी सुरक्षित स्थान की शरण न ले पायें हो तो जहां हैं यहीं रहें, हो सके तो पैरों के नीचे सूखी चीजें से जैसे लकडी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते रख लें तथा यथाशीघ्र सुरक्षित स्थान पर शरण लें। दोनो पैरों को आपस में सटा लें एवं दोनों हाथों से कानों को बंद कर अपने सिर को जमीन की तरफ यथा संभव शरीर को झुका लें तथा सिर को जमीन से न सटाए। जमीन पर कदापि न लेटें। ऊंचे इमारत वाले क्षेत्रों में शरण नहीं लें। साथ ही बिजली एवं टेलीफोन के खंभों के नीचे कदापि शरण नहीं लें. क्योंकि ऊंचे वृक्ष, ऊंची इमारते एवं टेलीफोन/बिजली के खम्भे आसमानी बिजली को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पैदल जा रहे हो तो धातु की डंडी वाले छातों का उपयोग न करें। यदि घर में हों तो पानी का नल, फ्रिज, टेलीफोन आदि को न छुए।
वज्रपात के मामले में मृत्यु का तात्कालिक कारण हृदयाघात है। अगर जरूरी हो तो “संजीवन क्रिया, प्राथमिक चिकित्सा” (Cardiopulmonary Resuscitation-CPR) प्रारम्भ कर दें। “संजीवन क्रिया, प्राथमिक चिकित्सा” (Cardiopulmonary Resuscitation-CPR) देने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि प्रभावित व्यक्ति के शरीर से विद्युत का प्रभाव न हो रहा हो। यह सुनिश्चित कर लें कि पीड़ित की नाड़ी एवं श्वास चल रही हो।
*वज्रपात के बाद*
घर के अंदर तब तक रहें जब तक कि आसमान साफ न हो जाए। स्थानीय प्रशासन को क्षति और मृत्यु की जानकारी दें। अगर कोई व्यक्ति वज्रपात की चपेट में आ गया है, तो तुरंत 112 पर कॉल करें और यथाशीघ्र पीड़ित को अस्पताल ले जाएं।
भ्रमः-
मिथक-वज्रपात कभी भी एक ही जगह / स्थान पर दो बार नहीं होता।
सत्य-ऊँची इमारतें व ऊँचे अकेले पेड पर वज्रपात एक से अधिक बार हो सकता है।
मिथक-वज्रपात प्रभावित व्यक्ति विद्युतीकृत होता है। यदि आप उन्हें छूते हैं, तो आपको करंट लग जाएगा।
सत्य-मानव शरीर विद्युत आवेश को संचित नहीं करता है। अतः प्रभावित व्यक्ति के शरीर को स्पर्श करना पूरी तरह से सुरक्षित है।
अपरिहार्य परिस्थितियो में उक्त का अनुपालन किया जाना आवश्यक है