*स्टॉक लिमिट सीमा के विरोध में गल्ला मंडी बंद रही*
*कोंच* केंद्र सरकार द्वारा घोषित स्टॉक लिमिट की नई नीति के विरोध में गल्ला मंडी बंद रही और व्यापारियों ने व्यापारिक कामकाज नहीं किया। इससे पहले 6 जुलाई को भी उन्होंने गल्ला मंडी बंद रख कर अपना विरोध दर्ज कराया था। गल्ला व्यापारी समिति का कहना है कि व्यापारियों के साथ अपराधियों जैसा सलूक किया जा रहा है जबकि व्यापारी के टैक्स से ही सरकारी खजाना भरता है। उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर गल्ला मंडी में व्यापारियों ने केंद्र सरकार के उस एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट जिसके तहत दलहनों पर स्टॉक लिमिट लगाई गई है और जो 31 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी, के विरोध स्वरूप व्यवसायिक कामकाज बंद रखा और बैठक करके सरकार से इसे बापिस लेने की मांग की। इस एक्ट के तहत मूंग को छोड़ अन्य दलहनों पर स्टॉक लिमिट लगाई गई है जिसके मुताबिक थोक विक्रेता अधिकतम 200 मीट्रिक टन (किसी भी दाल/दलहन का अधिकतम 100 मीट्रिक टन) का स्टॉक कर सकेंगे तथा रिटेलर अधिकतम 5 मीट्रिक टन। इसके साथ यह भी शर्त जोड़ी गई है कि उपभोक्ता मंत्रालय को इस स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से देनी होगी। गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय रावत ने इस नए एक्ट को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरकार से इसे बापिस लेने की मांग की है। इस दौरान विनोद दुवे, अजय गोयल, राममोहन रिछारिया, गोलू मिश्र अरविंद मिश्रा ध्रुवप्रताप सिंह, राजीव पटेल, नवनीत गुप्ता, मिथलेश गुप्ता, हरीश तिवारी, प्रेमनारायण राठौर, जयप्रकाश अग्रवाल, रामकुमार अग्रवाल, भास्कर गुप्ता, दिनेश अग्रवाल, राममोहन तीतविलासी, जगदीश राठौर सुधीर सोनी राजकुमार अग्रवाल रक्कू सहित तमाम व्यापारी मौजूद रहे।