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*वसंत पंचमी पर कुछ उपायों से माँ सरस्वती (शारदे) को करें प्रसन्न- ज्योतिर्विद संजय रावत*

*वसंत पंचमी पर कुछ उपायों से माँ सरस्वती (शारदे) को करें प्रसन्न- ज्योतिर्विद संजय रावत*

बसंत पंचमी का त्यौहार इस वर्ष 16 फरवरी मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। बसंत पंचमी के दिन हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा का विधान बताया गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी भारत वर्ष में बेहद ही धूमधाम के साथ मनाई जाती है। कुछ उपाय अपनाकर मनुष्य माँ सरस्वती को प्रसन्न कर सकते है। यह बात ज्योतिर्विद पं. संजय रावत शास्त्री राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षिणी सेवा समिति ने कही
पंडित संजय रावत ने बताया कि विद्या की देवी मां सरस्वती की कृपा से व्यक्ति को जीवन में ज्ञान, बुद्धि, विवेक का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में बसंत पंचमी के दिन लोग विधि विधान से मां सरस्वती की पूजा करते हैं। इस दिन स्कूल, कॉलेजों में भी सरस्वती वंदना की जाती है। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी से संबंधित दो खास मान्यताएं हैं। पहला इस दिन लोग पीला वस्त्र धारण करते हैं और दूसरा मां सरस्वती की पूजा। तो आइए आज हम जानते हैं कि, आखिर इन दोनों बातों का बसंत पंचमी के दिन क्या महत्व होता है। बसंत पंचमी के दिन क्यों करते हैं मां सरस्वती की पूजा? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ही विद्या की देवी मां सरस्वती ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुई थी और यही वजह है कि इस दिन प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी का दिन और सरस्वती पूजा की जाती है। इस दिन जो कोई भी व्यक्ति मां सरस्वती की विधिवत पूजा अर्चना करता है उसे मां सरस्वती की प्रसन्नता हासिल होती है।उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी पर पीला रंग ही क्यों माना गया है खास?*
अब प्रश्न उठता है कि, मां सरस्वती की पूजा या वसंत पंचमी के दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनने का इतना महत्व क्यों बताते हैं। तो दरअसल इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए गए हैं। पहला कारण यह है कि, बसंत पंचमी के दिन से ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और इस समय मौसम बेहद सुहावना होने लगता है। इस दौरान ना ही ज्यादा ठंड होती है और ना ही गर्मी होती है। वातावरण में भी खूबसूरती छाई रहती है। इस दौरान पेड़, पौधे, पत्ते, फूल, कलियां सभी खिलने लगते हैं और गांव में इस समय सरसों की फसलें लहराने लगती हैं। इसी सारी बातों से संबंधित इस दिन पीले रंग का महत्व बताया जाता है। इसके अलावा दूसरी मान्यता यह कहती है कि, बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण रहते है। सूर्य की किरणें इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि, व्यक्ति को भी सूर्य की तरह अपने जीवन में गंभीर और प्रखर बनना चाहिए। इन्हीं दोनों मान्यताओं के चलते बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहने जाते हैं। उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी पर बन रहा है अबूझ मुहूर्त। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो इस साल बसंत पंचमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत योग का गठबंधन अबूझ मुहूर्त बना रहा है। अबूझ मुहूर्त किसी भी तरह की मांगलिक और शुभ काम के लिए बेहद ही शुभ माने जाते हैं। हालाँकि इस बार बसंत पंचमी के दिन मांगलिक कार्य वर्जित रहने वाले हैं क्योंकि, इस दिन शुक्र तारा अस्त हो जाएगा और इसी के चलते वसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त होने के बावजूद इस दिन विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। उंन्होने बताया कि बसंत पंचमी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें।
इस दिन की पूजा में मां सरस्वती की विधिवत पूजा संपन्न करें और उन्हें पीले रंग के फूल, पीली रंग की मिठाई अवश्य अर्पित करें।
मां सरस्वती की पूजा में केसर या पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले वस्त्र भेंट करें।
बसंत पंचमी के दिन कामदेव अपनी पत्नी पति के साथ पृथ्वी पर आते हैं। क्योंकि इस दिन कामदेव की धरती पर आते हैं ऐसे में इस दिन की पूजा में भगवान विष्णु और कामदेव की आराधना का भी विधान बताया गया है। उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित होता है। ऐसे में इस दिन शिक्षा प्रारंभ करने, कोई नई विद्या सीखने, कला, संगीत इत्यादि सीखने के लिए यह दिन बेहद ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। बहुत से लोग वसंत पंचमी के दिन ही अपने छोटे बच्चों को अक्षर का ज्ञान यानी उनकी पढ़ाई की शुरुआत करवाते हैं।
ऐसी मान्यता है कि, इस दिन शुरू की गई शिक्षा के क्षेत्र में कोई भी पहल भविष्य में शुभ परिणाम प्रदान करती है। इसके अलावा गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के लिए भी वसंत पंचमी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन को ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 16 फरवरी को सुबह 03 बज-कर 36 मिनट पर हो रही है, जो की अगले दिन 17 फरवरी दिन बुधवार को सुबह 05 बज-कर 46 मिनट तक रहेंगी। उन्होंने कहा कि वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा अवधि 05 घंटे 36 मिनट। आपको इसी समय के बीच पूजा कर लेने की सलाह दी जाती है। 16 फरवरी को सुबह 06 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बीच सरस्वती पूजा का मुहूर्त उत्तम माना जा रहा है।

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