*लाखों का चूना सरकार को लगा गया एक भू-माफिया, दिमाग से खेला माफिया ने खेल, कि सब हो गए फैल-?*
जालौन:-कोंच में एक भूमाफिया सुमेश सोनी (थोड़ा परिवर्तित नाम) सरकार को लाखों का चूना मात्र एक 100 रुपये के स्टाम्प की आड़ लेकर लगा गया और वर्तमान में करोड़ों का कारोबार जमीन खरीद फरोख्त का करने में लगा है। दिखाता कुछ है और देता कुछ है के नाम से कोंच का फैमस भू-माफिया ने कैसे जीरो से लेकर करोड़पति तक का सफर कर डाला और वो भी बिना किसी सरकार को टैक्स दिए हुए, आईये इनकी कौरवगाथा को हम बताते हैं। दरसल यह भू-माफिया जब भी किसी की जमीन को खरीदता है तो वह जमीन अपने नाम नहीं कराता है जमीन जिसके नाम होती है वही मालिक रहता है और यह माफिया सुमेश सोनी (थोड़ा परिवर्तित नाम) बड़ी ही चालाकी से एक 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर अनुबंध लिखा लेता है वह भी बिना रजिस्टर्ड, उस स्टाम्प पर यह लिख लेता है कि एक साल या दो साल के अंदर तक वह इस जमीन के पूरे पैसा दे देगा और आधे पैसा यह तत्काल दे देता है। जिसके बाद फिर शुरू होती है इसकी प्लाटिंग स्कीम और कटने लगते है प्लाट। प्लाट बिक्री में रजिस्ट्री के समय चैक या आरटीजीएस सब कुछ खेत मालिक के नाम होता है और यह लोग उससे यह पैसा लेकर और धीरे- धीरे उसका भी पूरा हिसाब कर देते है। धीरे- धीरे अधिकांश प्लाट बिक जाते है और दो साल के लंबे समय में कुछ प्लाट तो बचे हुए कभी- कभी इतनी कीमत दे जाते है कि पूरी जमीन का पैसा वही बचे प्लाट ही पूरा कर देते है। कभी- कभी जब प्लॉट लास्ट में यदि 4-6 रह भी जाते है तब मजबूरी वश मन मशोस कर अपने घर और रिशेतदार के नाम कर दिए जाते है। अब यहां पर कैसे राजस्व और इनकम टैक्स विभाग को चूना लगाता है इसके बारे में बताते है। जो यह 100 के स्टाम्प पर लिखा पढ़ी कराता है। वह सिर्फ दूसरे को यह समझाने व हड़काने के लिए किया जाता है। कि तुम्हारी जमीन हमारे पास है और इसमें शर्ते भी लिखी है अगर नहीं मानी तो वह कार्यवाही कर देगा, जबकि इस स्टाम्प की कोई कीमत नहीं होती है, अगर करोड़ों लाखों की जमीन ऐसे ही 100 रु. के स्टाम्प पर होने लगे तो लोग रजिस्ट्री क्यों कराएं, वह हजारों/लाखों रुपये खर्च क्यों करें वह भी यह ही न लिखवा लिया करें। लेकिन यह सब होता है भय दिखाने के लिए, जबकि जानकार लोगों की बात माने तो उनका कहना है कि इस तरह की लिखा पढ़ी अनलिगल होती है, लेकिन यह भू-माफिया भय दिखाने के लिए इस तरह की लिखा पढ़ी का प्रयोग करते है। इससे एक साथ कई लाभ होते है एक तो जो सारी जमीन अपने नाम नहीं कराई तो वह राजस्व को लगा लम्बा चूना और जब इतनी बड़ी प्रोपर्टी में उनका नाम आएगा ही नहीं और किश्तों- किश्तों में प्लाट बिकेंगे तो इनकम टैक्स की भी निगाह इन भू-माफियाओं पर नहीं पड़ेगी। इस तरह से यह लोग राजस्व को व इनकम टैक्स विभाग को अच्छा खासा चूना लगा देते है। वहीं इस माफिया सुमेश सोनी (थोड़ा परिवर्तित नाम) की नियत भी खराब रहती है और यह दिखाता कुछ और देता कुछ है, बाद में जब कोई ज्यादा जबर निकल आता है तो उसे एन-केंन प्रकारेण संतुष्ट कर देता है और कोई सीधा -साधा निकला खरीददार तो वह लड़ाई न हो इसके लिए बेचारा जहां जगह यह दे देते है वहीं रहने को मजबूर हो जाते है। अभी हाल में ही एक खूब बड़ी लड़ाई इसके प्लाट बिक्री को लेकर हुई थी। लेकिन 10-20 लाख इधर -उधर करने की दम रखने वाले सुमेश सोनी (थोड़ा परिवर्तित नाम) ने लाल लाल रंग से इस मामले को शांत किया था। फिलहाल इनकम टैक्स के अधिकारियों को इस ओर विशेष ध्यान देना होगा कि किस तरह से 100 के स्टाम्प के सहारे यहां लाखों/ करोड़ों के बारे-न्यारे हो गए, बिना किसी कानूनी लिखा पढ़ी के, इस पर गौर कर ऐसे लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही जांच के बाद की जाए, प्लाट खरीदने वालों से, खेत बेचने वालों से जानकारी की जाए कि असली ख़रीददार कौन है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
*……….देखना न भूलें अभी अगला अंक भू-माफिया की ओर भी सारी करतूत……..*