धोखे से छीनी जमीन, 10 साल से न्याय को तरसता किसान अब अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा
झूठे मुकदमे, जानलेवा हमला और सिस्टम की चुप्पी—झांसी के मुन्ना लाल कुशवाहा की दर्दनाक दास्तान
झांसी। जनपद झांसी के पिछोर गांव निवासी गरीब एवं अशिक्षित किसान मुन्ना लाल कुशवाहा आज व्यवस्था, भ्रष्टाचार और विश्वासघात का जीवंत उदाहरण बन चुके हैं। लगभग 19.61 एकड़ पुश्तैनी कृषि भूमि के सह-खातेदार मुन्ना लाल, जो कभी अपने खेतों से परिवार का भरण-पोषण करते थे, आज अपनी ही जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं और वर्तमान में अस्पताल में जीवन एवं मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मामले के अनुसार वर्ष 2004 में उनके पिता भगवानदास एवं भाई काशीराम द्वारा अपने हिस्से की भूमि बेचने के दौरान मुन्ना लाल को गवाह बनाने के बहाने तहसील ले जाया गया, जहां आरोप है कि पहले से तैयार दस्तावेजों पर उनके विक्रेता के रूप में फर्जी हस्ताक्षर एवं अंगूठा निशान करा दिए गए। बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनकी जमीन भी हड़प ली गई तथा दाखिल-खारिज में फर्जी शपथपत्रों के माध्यम से नामांतरण कर लिया गया। पीड़ित का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में भू-माफियाओं, डीड राइटर तथा तहसील एवं रजिस्ट्रार कार्यालय के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत रही। इतना ही नहीं, विवादित भूमि, जो झांसी महायोजना 2001 और 2021 में “नगर पार्क” हेतु प्रस्तावित बताई जा रही है, उस पर अवैध प्लाटिंग कर कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, जिसकी शिकायतें संबंधित प्राधिकरण में किए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
न्याय की लड़ाई बनी सजा- वर्ष 2015 में जब मुन्ना लाल कुशवाहा ने न्यायालयों का दरवाजा खटखटाया और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ आवाज उठाई, तभी से उनके खिलाफ प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया। आरोप है कि उन पर और उनके पुत्रों पर बार-बार झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए और उन्हें जेल भेजा गया।
2022 में जानलेवा हमला, घर छोड़ने को मजबूर- स्थिति वर्ष 2022 में और भयावह हो गई, जब रात के समय उनके घर पर हमला किया गया। इस हमले में उन्होंने किसी तरह अपनी और अपने परिवार की जान बचाई, लेकिन इसके बाद उन्हें अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। तब से वे दोबारा अपने घर नहीं लौट सके हैं।
पुत्र का दर्द छलका- मुन्ना लाल कुशवाहा के पुत्र नरेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि “मेरे पिता को साजिश के तहत धोखे में रखकर उनकी जमीन छीन ली गई। पिछले 10 वर्षों से हम न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन हमें सिर्फ धमकियां, झूठे मुकदमे और उत्पीड़न ही मिला। आज मेरे पिता अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहे हैं, और हमारी जमीन पर अवैध कब्जा जारी है। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हमारा पूरा परिवार बर्बाद हो जाएगा।”
अस्पताल में जिंदगी की जंग- लगातार उत्पीड़न, मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी के चलते मुन्ना लाल कुशवाहा का स्वास्थ्य गंभीर रूप से बिगड़ चुका है। कई बीमारियों से जूझते हुए अब वे अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं, जबकि उनकी जमीन पर अवैध कब्जा और निर्माण कार्य कर मौज कर रहे है।
प्रशासन पर उठते सवाल- यह पूरा मामला न केवल एक किसान के साथ हुए अन्याय की कहानी है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या गरीब और अशिक्षित व्यक्ति के लिए न्याय पाना इतना कठिन हो गया है? क्या प्रशासनिक तंत्र भू-माफियाओं के सामने पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है?