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*स्थानीय मौसमी आपदाओं के दृष्टिगत जिलाधिकारी ने फसल बीमा कम्पनियों को दिये सख्त निर्देश*

ByNeeraj sahu

Apr 11, 2026
*स्थानीय मौसमी आपदाओं के दृष्टिगत जिलाधिकारी ने फसल बीमा कम्पनियों को दिये सख्त निर्देश*
*फसल हो या कृषि सम्पदा, बीमा सुरक्षा हमारा वादा- जिलाधिकारी*
*प्राकृतिक आपदाओं- वर्षा, तापमान, हवा एवं आर्द्रता के कारण किसी भी संसूचित फसल के नुकसान होने की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज एवं वित्तीय सहायता प्रदान कराने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध- जिलाधिकारी*
   जनपद में बदलते मौसम एवं स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं—जैसे ओलावृष्टि, तूफान, बेमौसम वर्षा, अत्यधिक तापमान, हवा एवं आर्द्रता—से फसलों को हो रहे संभावित नुकसान को देखते हुए जिलाधिकारी श्री मृदुल चौधरी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संबंधित बीमा कम्पनियों के प्रभारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
  जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन किसानों की सुरक्षा एवं हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसी भी अधिसूचित फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बीमा कम्पनियों को निर्देशित किया कि वे पूरी संवेदनशीलता, तत्परता एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक किसानों को योजना से लाभान्वित करें।
  जिलाधिकारी श्री मृदुल चौधरी ने किसान भाइयों को जागरूक करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य न केवल प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई करना है, बल्कि किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले बीज एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने हेतु प्रोत्साहित करना भी है, जिससे उनकी आय स्थिर रह सके। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी कृषक—चाहे वे ऋणी हों या गैर-ऋणी—पात्र हैं। ऋणी कृषकों के लिए यह आवश्यक है कि यदि वे बीमा में शामिल नहीं होना चाहते हैं तो बीमा की अंतिम तिथि से 7 दिन पूर्व संबंधित बैंक में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करें।
  बीमा योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के जोखिमों को कवर किया जाता है। ग्राम पंचायत स्तर पर असफल बुवाई, फसल अवधि के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान तथा वास्तविक उपज में कमी की स्थिति को शामिल किया गया है। वहीं व्यक्तिगत स्तर पर ओलावृष्टि, जलभराव, भू-स्खलन, बादल फटना एवं आकाशीय बिजली से उत्पन्न आग जैसी घटनाओं से खड़ी फसल को हुए नुकसान को भी कवर किया जाता है। इसके अतिरिक्त फसल कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाई के दौरान ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश से होने वाली क्षति भी योजना में सम्मिलित है।
  जिलाधिकारी श्री मृदुल चौधरी ने यह भी बताया कि किसी भी प्रकार की फसल क्षति की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर 14447, संबंधित बैंक शाखा, कृषि एवं उद्यान विभाग कार्यालय अथवा क्रॉप इंश्योरेंस ऐप का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों द्वारा देय प्रीमियम के अतिरिक्त कोई अन्य शुल्क देय नहीं है। बीमा से संबंधित जानकारी एवं आवेदन हेतु किसान अपने नजदीकी बैंक शाखा, जन सेवा केंद्र, अधिकृत बीमा एजेंट या भारत सरकार के पीएमएफबीवाई पोर्टल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
  अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं बीमा कंपनियों को निर्देशित किया कि वे आपदा की स्थिति में त्वरित सर्वेक्षण कर प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी कृषक को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
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